तो क्या मैं मान जाऊँ?
गलती उसकी है,
मैं अड़ा रहूँगा,
वो माफ़ी मांगे,
तभी तो बड़ा रहूँगा,
जीतने की इस होड़ में,
सोच रहा हूँ, हार जाऊँ,
तो क्या मैं मान जाऊँ?
उसने छोड़ा, समझा नहीं,
मेरा अलग तरीका है,
वो मेरे हिसाब से नहीं चलता,
ये गलत सलीका है,
वो मर जायेगा एक दिन,
मैं कहाँ लेकर मकान जाऊँ?
तो क्या मैं मान जाऊँ?
पागल है वो,
बेपरवाह है,
अक्ल नहीं है,
बिगड़ गया है,
'आकाश' को पाने की जिद्द में,
बेच सब जहान जाऊँ?
तो क्या मैं मान जाऊँ

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