" ज़िन्दगी और ख़ुशी.... "

" ज़िन्दगी और ख़ुशी.... "
हालात बदल देती है ज़िन्दगी,
जब भी कोशिश भरपूर करता हूँ,
उम्मीदों के हवाले यूँही मैं,
अपने ख्वाबों को चूर चूर करता हूँ,
पलट कर हँसती है वो मुझपर,
जब भी उसकी तारीफ़ ख़ूब करता हूँ,
फिर सुनहरा चेहरा उतार कर कहती है,
तू समझा ही शायद जो बात मैं तुझसे कहती हूँ,
लाखों के लोग और करोड़ों की बातें,
जिनकी मैं बात करता हूँ,
चलाने वाली तो है ज़िन्दगी सबकों मगर,
बेवज़ह ही पत्थरों से फ़रियाद करता हूँ,
ना मंजिलें दिखे है मुझको ना ही कोई रास्ता,
फिर क्यों भला मैं मौकों की तलाश करता हूँ,
ख्वाबों की मौत से भरी तो है ये तमाम ज़िन्दगी,
मगर खुशियों के चंद लम्हों से बहुत प्यार करता हूँ,
ज़िन्दगी तुझें समझना आसां नही,
फिर वक़्त क्यों मैं इस पर ज़ाया करता हूँ,
शगूफ़ा थोड़े ही है ये साँसे मेरी,
तोहफ़ा है, तो चलो किसी को आबाद करता हूँ..!!

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