वो मेरे पापा के कंधे

वोह मेरे पापा के कंधे..
मज़बूत कंधे
सुडौल कंधे
चौड़े कंधे
गुदगुदे कंधे
और उन कन्धों पर एक नन्हा सा सर
लार की धारा से भीगते कंधे
वोह मेरे पापा के कंधे..
कभी सिंघासन बन जाते कंधे
मेलों में बिठाते कंधे
भीड़ में सबसे ऊँचे कंधे
दुनिया के रंग दिखाते कंधे
और उन कन्धों पर थक कर सो जाती मैं
वोह मेरे पापा के कंधे..
दरवाज़ों के पीछे छुपते कंधे
इम्तिहान में साथ में जागते कंधे
हर जीत का जष्न मनाते कंधे
हर हार में दिलासा देते कंधे
और उन कन्धों पर सुबक सुबक रो जाती में
वोह मेरे पापा के कंधे..
माइक्रोस्कोप के पीछे वोह कंधे
धूप में कार चलाते कंधे
एडमिशन की लाइन में खड़े कंधे
फीस के पैसे भरते कंधे
और उन कन्धों पर काबिल बनती में
वोह मेरे पापा के कंधे
सगाई पर मेरी झूमते कंधे
शादी में मेरी नाचते कंधे
दिलदार खातिरदारी कंधे
सब तैयारी करते कंधे
और उन कंधो से विदा होती मैं
वोह मेरे पापा के कंधे..
कभी दर्द छुपाते कंधे
कमज़ोरी से लरजते कंधे
थक गए कंधे,झुक गए कंधे
सो गए फिर शव शय्या पर कंधे
 और उन कन्धों को कन्धा देती मैं
अग्नि में ओझल होते देखती मैं
वोह मेरे पापा के कंधे..
दुलार पुचकार से भरे कंधे
हमेशा पास रहेंगे कंधे

Comments