कविता
तुम मुझसे बतियाने आना"
आंखें जब सूनी हो जाए
मन का कोना रित रहा हो,
अपने लगने लगे पराये
मुश्किल से पल बित रहा हो।
एक पल भी फिर नहीं गवाना
तुम मुझसे बतियाने आना।।
लगे सताने कोई तुमको
तुमसे कोई खेल रहा हो,
जज़्बातों की आड़ लिए कोई
अपनी रोटी बेल रहा हो।
उनको उनका चेहरा दिखाना
तुम मुझसे बतियाने आना।।
स्वाभिमान छलनी कर दे कोई
नीजता की हद पार करे,
झूठी इज्जत की खातिर जब
तुझ पर कोई वार करे।
ताकत अपनी उन्हें बताना
तुम मुझसे बतियाने आना।।
तोल-मोल कर ताके कोई
जब भावों का भाव करे,
मन अपना बहलाने को कोई
जब घावों पर घाव करे।
तुम उनके आगे तन जाना
फिर मुझसे बतियाने आना
आंखें जब सूनी हो जाए
मन का कोना रित रहा हो,
अपने लगने लगे पराये
मुश्किल से पल बित रहा हो।
एक पल भी फिर नहीं गवाना
तुम मुझसे बतियाने आना।।
लगे सताने कोई तुमको
तुमसे कोई खेल रहा हो,
जज़्बातों की आड़ लिए कोई
अपनी रोटी बेल रहा हो।
उनको उनका चेहरा दिखाना
तुम मुझसे बतियाने आना।।
स्वाभिमान छलनी कर दे कोई
नीजता की हद पार करे,
झूठी इज्जत की खातिर जब
तुझ पर कोई वार करे।
ताकत अपनी उन्हें बताना
तुम मुझसे बतियाने आना।।
तोल-मोल कर ताके कोई
जब भावों का भाव करे,
मन अपना बहलाने को कोई
जब घावों पर घाव करे।
तुम उनके आगे तन जाना
फिर मुझसे बतियाने आना
Comments
Post a Comment